ZINDAGI {FINAL PART}

ज़िन्दगी {Zindagi}

समझ नही आ रहा इसके आगे मै क्या लिखूँ 
क्योंकि ज़िन्दगी के न जाने है कितने पहलू 
चाहे मै कितनी भी अच्छी बातें क्यों न कहलूँ 
रब से ये दुआ कि हर problem  सहलूं 
सह, सह के ही निकलते है आंसू 
आंसुओं से ही फट्टू बनता है धाँसू 
इतना ही सोच की है बहुत खास तू 
अपने माँ-बाप की है, एकलौती आश तू 


एक Aim के बिना तेरी Life है बेकार 
ये तेरा गलत है सोचना कि जीने के दिन चार 
गलतियों के चलते मिलती कितनों को फटकार 
गलती को सुधार और खुदको तू निखार 
उसके बारे में सोच मत जो पीछे है छूटा 

 

सिर्फ अकेला तू नहीं वो जिसका Luck है फूटा 
अपने Sacrifices के लिए क्यों है तू रूठा 
आने वाले कल के लिए खुदको तू लुटा 
मेहनत के दम पर कोई Success को है छूता 
आज वो शिखर पर है, जो Polish करता था जूता 


सिर्फ पढ़ाई और प्यार नहीं ज़िन्दगी 
धुएँ में उड़ जाए, छोटी सिगार नहीं ये ज़िन्दगी 
जल्दी ख़त्म हो जाए, पहली पगार नहीं ये ज़िन्दगी 
हर मोड पर खतरा, पर दो धारी तलवार नहीं ये ज़िन्दगी 
Aim के बिना बेकार है ये ज़िन्दगी 
Failure से Success की कगार है ये ज़िन्दगी 
सिर्फ माँ-बाप और परिवार ही है ज़िन्दगी 
सिर्फ एक बार मौका देती, बार-बार नहीं ये ज़िन्दगी। 

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WRITTEN BY-

SIDHANT
 
 Also do not forget to read Zindagi {Part 1, 2, 3 4}

THANKS FOR READING.

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CreativeKawi

Author & Editor

Creative writing with valueable content.

1 Comments:

👍Thanks for appreciating me.
Keep loving and keep sharing 👍
Thanks for reading..