Bechain

 बेचैन
                                                                           
        
   ना जाने दिल मेरा क्यों बेचैन है 
 ना जाने आँसुओं से भरे क्यों नैन है
 ऐसी कौन-सी बात है जिसने उड़ाया मेरा चैन है 
ना जाने दिल मेरा क्यों बेचैन है 
 
ना जाने  दिल मेरा क्यों उदास है 
ना जाने इसे किस चीज की आश है 
महसूस हो रहा मुझे कुछ खास है 
न जाने फिर भी दिल क्यों उदास है 

ना जाने दिमाग मेरा किस सोच में पड़ा है 
दिल तो मेरा मान गया पर 
दिमाग मेरा ज़िद पर अड़ा है 
क्योंकि दिमाग मेरा खयालों की सोच में पड़ा है 

दिलोदिमाग के खयालो को निकाल रहा मेरा कलम है 
 दिल मेरा बेचैन है शायद ये मेरा भ्रम है 

ना जाने दिल मेरा क्यों गुस्सा है 
ना जाने दिल मेरा किस जाल में फँसा है 
ना जाने ये फिर भ्रम है या नशा है 
जिसने मेरे दिमाग के नसों को कसा है 
समझ नहीं आ रहा अब भी ये दिल क्यों गुस्सा है 

सोचा एक दिन चलूँ ज़िन्दगी का हाथ थाम के 
पर ये बातें तो हैं सिर्फ नाम के 
मन नहीं लग रहा मेरा किसी काम में 
 फर्क पता नहीं चल रहा सुबह-शाम में 

ना जाने ये कैसी है परेशानी
है इसमें लाभ या हानि 
झूठी नहीं सच्ची है ये कहानी 
ये बात मैंने अब तक ना जानी 

कि न जाने दिल मेरा क्यों बेचैन हैं
ना जाने आँसुओ से भरे क्यों नैन हैं !!!!!


                                                                                                    WRITTEN BY-

SIDHANT

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3 Comments:

👍Thanks for appreciating me.
Keep loving and keep sharing 👍
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