ZINDAGI {PART-2}

ज़िन्दगी 


ज़िन्दगी है ये, नहीं है ये मजाक 
तू है आग, बाकी है राख 
बहुत सो लिया, जल्दी तू जाग 
कोई तेरे साथ नहीं अकेले तू भाग 
रास्ते में मिलेंगे तुझे कई शेषनाग 

कई नाग मिलेंगे तुझे डँसने के लिए 
कई जाल मिलेंगे तेरे फँसने के लिए 
कई शिकंजे मिलेंगे तुझे कसने के लिए 
मिलेगा नहीं मौका तुझे हंसने के लिए 
ज़िन्दगी देती नहीं बार-बार मौका 
कई तो हैं ऐसे जिनको मिलता बस धोखा 
जिन्हे मिलता मौका उन्होंने खुदको है रोका 
इस जालिम दुनिया वालों ने उनको है टोका
संभल-संभल के चला अपनी लाइफ की ये नौका 
तू बन शातिर, बन ना मत तू बोका 

इस दुनिया में दो वजहों से लोग अपनी ज़िन्दगी से हाथ धो बैठते हैं
पहला पढ़ाई और दूसरा प्यार  
तू पहले पढ़ाकुओं के बारे में उन्ही के मुँह से सुनते हैं  

10 क्लास तक मैंने टॉप रैंक लायी  
फिर पापा ने मुझको कॉलेज में admission दिलाई 
किसी और के बेटे को देखकर, hard stream select कराई 
मेरे लक्ष्य से मेरे फोकस को हटाई 
सिर्फ पढ़ाई, सिर्फ पढ़ाई, सिर्फ पढ़ाई में दिमाग लगाई 
पता नहीं चला कब ये बोझ बन गयी भाई
TO BE CONTINUED 

Written By-

SIDHANT

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Creative writing with valueable content.

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👍Thanks for appreciating me.
Keep loving and keep sharing 👍
Thanks for reading..